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हनुमान भगवान जी जब मच्छड़ का रूप ले कर रात में लंका प्रवेश कर रहे थे तब लंका की पहरेदार लंकिनी ने उन्हें रोका।
हनुमान भगवान जी ने लंकिनी पर घूँसे से प्रहार किया जिससे लंकिनी ज़मीन पर गिर पड़ी।
लंकिनी को याद आया कि ब्रम्हाजी ने लंका की पहरेदारी सौंपते हुये उससे कहा था कि जब एक बंदर के रूप में भगवान राम के दूत आ कर तुम पर प्रहार करेंगे तब समझ लेना कि अब राक्षसों के संहार का समय आ गया है।
लंकिनी ने ज़मीन से उठकर भगवान राम और भगवान हनुमान जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया और कहा कि आप के दर्शन का सुअवसर हमें मिला, हम धन्य हो गये।
आपने आगे कहा कि यदि तराज़ू के एक पलड़े में स्वर्ग और मोक्ष का सुख रख दिया जाये और दूसरे में सत्संग का सुख तो सत्संग का पलड़ा हमेशा भारी होगा।
*सादर*
*जय सियाराम सदा*
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Jai Baba to You
Yours Sincerely
Chandar Meher