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आज दस जुलाई, मौन दिवस है, इस दिन बाबा प्रेमी रात 12 बजे से अगली रात 12 बजे तक 24 घंटे मौन रखते हैं तथा इस विशेष दिन में भाग लेते हैं।
प्रारंभ में प्रियतम बाबा ने कहा कि वे सिर्फ 1 वर्ष के लिये मौन रख रहे हैं किंतु यह बढ़ता रहा और फिर हमेशा अखंड रहा।
प्रियतम बाबा का कहना है कि यह मौन उनके सघन आध्यात्मिक कार्य के लिये है।
चूँकि इंद्रियाँ बाह्य जगत (माया) में भटकाती हैं और भीतरी यात्रा से रोकती हैं और भीतरी यात्रा ही ईश्वर से एकाकार करवाता है अथवा आत्मबोध (Self Realization) करवाता है अतः आध्यात्मिक प्रगति के लिये इंद्रिय निग्रह (इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना) आवश्यक है जो कि आंतरिक मौन से ही प्राप्त होता है।
बाह्य मौन एक अभ्यास है जो आंतरिक मौन को प्राप्त करने में मदद करता है। (बाबा ने कहा है - Self Realization is God Realization)।
प्रारम्भ में बाबा प्रेमियों को 24 घंटे का आहार व्रत अथवा मौन व्रत रखने के लिये प्रियतम बाबा ने कहा फिर दोनों में से किसी भी एक अभ्यास को करने के लिये कहा। बाद में, कुछ लोगों ने अपनी ज़िम्मेदारियों (विशेषकर कार्यालयीन) के कारण दोनों ही व्रत करने में असमर्थता जताई तो प्रियतम बाबा ने दोनों ही प्रकार के व्रतों से छूट दे दी।
प्रियतम बाबा ने कहा कि सबसे बड़ा चमत्कार तब होगा जब वे मौन खोलेंगे और शब्दों के शब्द का उच्चारण करेंगे।
कई लोगों का मानना है कि प्रियतम बाबा हमारे हृदय में अपना मौन खोलेंगे। किंतु इसके लिये हमें अपने हृदय को इच्छाओं से रिक्त कर प्रियतम बाबा के प्रकटीकरण के लिये स्थान बनाना होगा।
प्रियतम बाबा ने कहा है कि मैं आपके हृदय में आने का कई बार प्रयास करता हूँ किंतु बार-बार आपके हृदय को इच्छाओं से भरा पाता हूँ।
गोल मेज़ सम्मेलन में जाते हुये प्रियतम बाबा और गाँधी जी की भेंट हुई। इस भेंट से गाँधी जी इतने प्रभावित हुये कि प्रत्येक सप्ताह के सोमवार को गाँधीजी ने मौन व्रत रखना प्रारम्भ किया।
जब प्रियतम बाबा ने कहा कि वे एक वर्ष के लिये मौन धारण करने वाले हैं तो एक बाबा प्रेमी ने कहा कि प्रियतम बाबा यदि आपने मौन धारण किया तो हमें सत्य कौन सिखायेगा।
यह बात सुनकर प्रियतम बाबा ने कहा - मैं सिखाने नहीं जगाने आया हूँ ।
प्रियतम बाबा ने बताया कि एक रोज़ मौन दिवस पूरे विश्व में त्यौहार की तरह मनाया जायेगा।
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Chandar Meher