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कल 14 दिसंबर को गिधैला, देवराजनगर, मैहर में, गृध्रराज पर्वत के सम्मुख, एक पहाड़ पर निर्माणाधीन राजाधिराज बड़े मंदिर के परिसर जिसे छोटी अयोध्या भी कहा जाता है, जहाँ पंचमुखी बजरंगबली भगवान विराजे हैं, में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा खाद्य प्रसंस्करण से रोज़गार विषय पर इस रमणीक स्थल पर आयोजित प्रशिक्षण में भाग लेने का मौका मिला।
यह पर्वत, विंध्याचल की कैमूर श्रृंखला (Kaimur Range) और मैकाल पहाड़ियों (Maikal Hills) के बीच में पड़ता है।
यह पर्वत स्वयं उत्तर में कैमूर श्रृंखला की पहाड़ियों और दक्षिण में मैकाल पहाड़ियों के बीच स्थित है, लेकिन इसे समग्र रूप से विंध्याचल पर्वतमाला का पूर्वी विस्तार माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस पर्वत का आकार जटायु महाराज की आकृति की तरह है।
यह भी कहा जाता है कि इस पर्वत की तलहटी में जटायु जी के अनुज संपाति का जन्म हुआ था तथा जटायु महाराज और संपाति जी यहीं रहा करते थे।
पुराणों में उल्लेख है कि संपाती और जटायु विंध्याचल पर्वत की तलहटी में रहने वाले निशाकर ऋषि की सेवा करते थे और दंडकारण्य क्षेत्र में विचरण करते थे।
ऐसा कहा जाता है कि रावण से युद्ध में आहत हो कर जटायु महाराज इसी पर्वत पर आये थे।
इस पर्वत से कुछ दूर पर स्थित एक और पहाड़ पर माँ काली का मंदिर है जो कि मैहर में विराजी माँ शारदा की बहन मानी जाती हैं।
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